कम पैसों से अपना व्यापार कैसे बड़ा करें.?

कम पैसों से अपना व्यापार कैसे बड़ा करें.? 


दोस्तों जेसे ही हमारे दिमाग में busyness (व्यापार) शब्द आता है तो हमारे मन में सबसे पहले क्या सवाल आता है? पैसा क्यों है ना मतलब कि हम लोग ये सोचते है, कि जिसके पास पैसा है, वही व्यापार कर सकता है! सबका सपना होता है, कि मुझे भी व्यापार करना है! लेकिन पैसे की समस्या हो जाती है! जिसके कारण हमारा सपना चूर चूर हो जाता है! लेकिन हम आपको कुछ एसी जानकारी देने वाले है, जिसे जानकर आप लोगों को हैरानी हो होगी! हम आप लोगों ये बताने वाले हैं, कि कम पैसे से व्यापार कैसे किया जा सकता है..? इसके कुछ स्टेप है :-
Fly light model :- इसका   मतलब यह है, कि किसी भी  बिजीनेस को ऊपर तक ले जाना ग्रोथ करना  या अपना  व्यापार को बढ़ाना  सभी  लोग चाहते हैं  कि उसका व्यापार ऊंची बुलंदी को छुए!  वो भी कम लागत  मे, exp के   लिए जितने  भी ऑनलाइन APP है,  ये लोग अपना खुद का  वेबसाइट बनाया  इनमे  ट्रेफिक आना चालू  हुआ  और  धीरे  धीरे  करके अपना स्थान बना  लिया! इसी  तरह Ola, Uber बहुत  बड़ा टेक्सी  सर्विस है! लेकिन हैरानी   की बात है, कि इसके पास एक भी
टेक्सी नहीं है! और ना ही  इनके पास ड्राइवर    है!  Apple कम्पनी  भी  बहुत बड़ी है, लेकिन यह  खुद मोबाइल  नहीं  बनाती है! बल्कि foxcon कम्पनी इसके  लिए मोबाइल बना  है!   फिर यह  कंपनी  का लोगो  लगाकर सेलिंग  करती है! ये कम्पनी  मुख्य  रूप से तीन चीजो पर काम  करती है:-


1.high return  of asset.
2 controlled profit fluction.
3.scablity driven cost.
ये  प्रोफेशनल  कम्पनी इसी के आधार पर काम करती है! ये   तो  थी कुछ कम्पनी के   बारे में  की   ये  अपना व्यापार  कैसे  करते  है!
  अब   ऎसे 5 प्रकार  बताने वालें है जिससे अपना  व्यापार को ग्रोथ कर  सकते हो :-
  1.frenchising :-frenchiser और frenchisee इन दोनों के aseet light लागू होता  है!  दोनों का  लोड शेयर हो जाता है!  और दोनों का व्यापार बड़ा  जाता  है! Frenchiser  को  हर नया व्यापार करने मे केपिटल इनवेस्ट नहीं करना पड़ता है! Frenchisee को  नया व्यापार  करने में    सेल्स मार्केटिंग, सेल्स एजुकेशन,  ट्रेनिंग,  बीजीनेस टूल्स देना पड़ता है! दोनों के   लिए aset light modle है! इसी  तरह कामधेनु  सरिया भी इसी तरह  के frenchisee  लेके  अपना व्यापार कर रहा है! इसके 10500  डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर है ,  और 70 frenchisee है! जो इनका प्रोडक्ट बनाते हैं! और यह  सिर्फ़  इन्हे गाइड लाइन करते है!

2.out Sourcing :-  out sourcing  एक ऐसा मॉडल है,  जहां पर अपनी  कास्ट को  रिड्यूस कर लेते हैं!  और ऑपरेशन एफिशिएंसी   बिल्ड कर लेते हैंl मतलब यह ऐसा है, कि  मैन्युफैक्चरिंग कंपनी अपनी प्रोडक्ट बनाती है!  और उसे किसी सिस्टम के द्वारा  मार्केटिंग करने के लिए भेज देती है!  या खुद मार्केटिंग नहीं करता बल्कि दूसरों के जरिए मार्केटिंग करवाता है!  जैसे कि एप्पल कंपनी खुद अपना प्रोडक्ट नहीं बनाती है!  लेकिन  या कंपनी बनाई हुई प्रोडक्ट को अपनी ब्रांड लगाकर  सेलिंग करती है,  जिसे हम आउटसोर्सिंग कहते हैं!  हमें लाइफ में कभी भी सारे काम नहीं करने होते,  बल्कि दूसरे के जरिए   करवाना पड़ेगा तभी हम अपनी व्यापार को ऊंची बुलंदियों पर ले जा सकेंगे!  जितने भी बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं सब इसी सोर्स पे अबे काम करती है!  तभी आज यह इतनी बुलंदियों पर है!   छोटे-छोटे व्यापारियों लोग खुद ही अपना काम करते हैं!  इसलिए वह अपनी व्यापार में ज्यादा सफल नहीं हो पाते हैं!
3.aseet and sharing modle :-इसमें   क्या होता है कि जो बड़े-बड़े कंपनियां होती है  ऐसेट  का cast जाता है, तो  तो यह  शेयरिंग मॉडल अपनाते हैं,  मतलब की   एक दूसरे   आपस में  saring करके  अपना बिजनेस डेवलपमेंट करते हैं!  जैसे कि बड़ी बड़ी oil कंपनी एक मशीन खरीद लेती है!  और उस मशीन को आपस में शेयर करके चलाते हैं! ये लोग क्या करते हैं कि  आधा दिन आप चलाएंगे,  और आधा दिन मैं चलाउंगा ऐसा करके  अपनी शेयरिंग कर लेते हैं!  और इसी तरह यह लोग बिजनेस पार्टनर बन जाते हैं!   और दोनों मिलकर व्यापार को डेवलपमेंट करते हैं!  जितना खर्चा होना चाहिए वह कम लागत में  पूरा हो जाती है!  जैसे कि ओयो कंपनी ने क्या किया ए कंपनी पहले से बनी हुई थी और  उसी asset को  शेयर कर दिया! अब oyo को  ना प्रॉपर्टी खरीदनी है, और  ना ही  मार्केटिंग करनी है!  इससे क्या हुआ उनकी लागत कम आई और कम समय में ही  सत्ता जमा लिया!  और तेजी से उनका व्यापार चलने लगा!   और समय के भी बचत हो गया!  महिंद्रा लॉजिस्टिक पूरी तरह ग्रोथ कर रही है!  एसेट लाइट मॉडल में,  ऑटोमोबाइल  में,  फार्मा में, ई-कॉमर्स में,  आदि  इन सब में महिंद्रा अपनी सर्विस दे रही है! सब कुछ पार्टनरशिप में  चला रही है!  ना तो वह  इन्वेस्टमेंट कर रहा है, और  ना ही वेयरहाउस, और नहीं वेहिकल, और ना ही  मेन पावर लगाती है कुछ पार्टनरशिप में कर रही है!  जिसे शेयरिंग मॉडल  कहते हैं!

4.pey- per use :- इसके भी बहुत सारी उदाहरण है  co saring sapace, CO working space,  मान लीजिए आपकी कंपनी दिल्ली में है!  और आपकी 300 लोगों की मेन पावर है!  लेकिन आपको किस लोगों की छोटा सा ऑफिस  खोलना है  मुंबई में,  20 का चेन्नई में,  और 30 का  हैदराबाद में ऑफिस खोलना है!  और ऐसे सारी कॉन्सेप्ट आ गए हैं pay -per use का  इसमें क्या होता है की आप के जितने भी लोग हैं लोगों का ही पेसे दें प्रिंटर  सब कंपनी के लिए  आम हो गया है! वशरूम, और  इंटरनेट का  कामन use के लिए  होता है!  जैसे कि अपना  कैबिन बना होता है उसी में ही हम अपना काम चलाते हैं और उसको ज्यादा पैसे भी देना नहीं पड़ता!  या कम लागत में भी  ट्रेनिंग पूरा हो जाती है!   हम फिर से नए केबिन  चालू करना चाहेंगे  दूसरी लागत भी ज्यादा आएगा pay - per use का उपयोग किया जाता है!

5.:- कई सारी फार्मा कंपनी अपनी लाइसेंस इन बचाने के लिए अपनी ब्रांड डेवलपमेंट  कास्ट बचाने के लिए  लाइसेंस आउट कर देती है अपनी प्रोडक्ट को,  और लाइसेंसिंग कर लेती है!  बड़ी  आरएंडी का माल  अपने आप बेचेगा और लेके आएगा!  और जो कहता है मेरा लाइसेंस लेकर प्रोडक्ट बना लो और मुझे लाइसेंसी आउट दे दो!  तो इसी तरह मे  अपनी व्यापार को बढ़ा सकते हैं!  दुनिया में प्रकार की ऐसी बिजनेस को impruve  करने के लिए  ट्रेनिंग लिया जाता है जिसे आप अपना बिजनेस  बढ़ाने का  नियम बताया जाता है किस तरह अपने बिजनेस को की ओर ले जा सकते,  अपने बिजनेस में सफलता प्राप्त करें! 

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